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पाप या पुण्य

                                                          भगवती चरण वर्मा की कहानी ' प्रायश्चित ' हम सभी ने पढ़ी है |  लाला घासीराम की पतोहू , रामू की बहू के हाथों कबरी बिल्ली की हत्या - ब्रह्म मुहूर्त में हत्या अर्थात् घोर पाप | पंडित परमसुख का कहा जाना - ' यह तो नरक का विधान है ' - घर के सभी सदस्यों को मानसिक तनाव में डाल देता है | अगला जन्म नारकीय न हो , पंडित जी इसका मार्ग भी निकाल लेते हैं - ग्यारह तोले की सोने की बिल्ली और मनो अनाज का दान , साथ ही ब्राह्मणों का भोज | पूरी योजना कागज़ पर उतारी गई , इस बीच पता चला - बिल्ली उठ कर भाग गई |
                                                            आज ऐसी ही स्थिति मेरे एक परिचित के पड़ोसी की है | इन्हें किसी पंडित या भविष्यवक्ता द्वारा सुझाया गया - 'अगला जन्म सुधारना हो तो इस जन्म में गायों को भरपेट खिलाओ |'  ये श्रीमान् छः बजे से जुट जाते हैं | प्रतिदिन गायों के लिए विभिन्न सब्जी या फल इकट्ठा करते रहते हैं , जैसे - 5 किलो आलू / गाजर / टमाटर / पत्ता सब्जी या 15 किलो पपीता / केला आदि | श्रीमान् गायों के इस भोजन की सड़क पर ढेरी बना देते हैं | कुछ दिन तो ये डंडे के सहारे गायों को लाते थे , पर अब गायें स्वयं उनके द्वार पहुँच जाती हैं | यह कल्पना करना मुश्किल है कि सड़क पर कितनी गन्दगी और छीछालेदर होती है | गायों के जमघट से वाहनों को निकलने में परेशानी अलग - | हादसे की आशंका का भय बना ही रहता है | श्रीमान् को समझाना - बिल्ली के गले में घंटी बाँधने के बराबर है | इसमें कोई संशय नहीं - गायों को भोजन कराना बहुत पुण्य - कर्म है , परन्तु खाद्य पदार्थों की बेकद्री तो पुण्य नहीं | गोशाला में जा कर गायों का पेट भरा जाय - यह श्रेयस्कर होगा | वहाँ व्यवस्था भी उसी अनुसार होती है |
                                                          प्रातः सैर के लिए निकलते हैं , तो देखते हैं - कुछ लोग सड़क पर आटा डालते हैं , जिससे चीटियों को भी कुछ गिजा मिल जाय | इससे चीटियों का रैला पूरी सड़क पर आच्छादित हो जाता है | ये चीटियाँ आते जाते लोगों के पैरों से कुचली ही जाती हैं | आटा डालने वाले यह नहीं सोचते कि उनके द्वारा किया गया पुण्य दूसरे को पाप का भागीदार बना रहा है | प्रायः घरो में चीटियाँ बढ़ जाती हैं तो हम उन्हें हटाने के लिए कीटनाशक दवाइयां डालते हैं , तब आटा क्यों नहीं डालते ! हम जानते हैं - चीटियाँ घर को जमीन को नुकसान पहुँचाती हैं |
                                                     जरुरत है - इन अन्धमान्यताओं से बाहर निकलने की ---|


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