आज ही की पावन बेला में थामे थे हाथ ,
सुख -दुःख में मिलकर चले साथ-साथ |
प्रेम और विश्वास है भरपूर कमाया ,
जन्नत - सा घर मिल कर बनाया |
खुश हैं जिन्दगी में जो कुछ मिला ,
जो न मिला , ना है इसका गिला |
जीवन में रिश्तों का भण्डार मिला ,
कुहासे के बीच आशाओं का अम्बार मिला |
बुजुर्गों के आशीष की सम्पदा मिली ,
बच्चों का प्यार , सहयोग अपार मिला |
रिश्तों में रिश्ते यूँ ही फलते रहे ,
हम पीढ़ियों - बीच सेतु बने रहें |
रुठते-मनाते हम यूँ ही चलते जाएँ ,
बन संबल एक दूजे का साथ निभाए |
सुख -दुःख में मिलकर चले साथ-साथ |
प्रेम और विश्वास है भरपूर कमाया ,
जन्नत - सा घर मिल कर बनाया |
खुश हैं जिन्दगी में जो कुछ मिला ,
जो न मिला , ना है इसका गिला |
जीवन में रिश्तों का भण्डार मिला ,
कुहासे के बीच आशाओं का अम्बार मिला |
बुजुर्गों के आशीष की सम्पदा मिली ,
बच्चों का प्यार , सहयोग अपार मिला |
रिश्तों में रिश्ते यूँ ही फलते रहे ,
हम पीढ़ियों - बीच सेतु बने रहें |
रुठते-मनाते हम यूँ ही चलते जाएँ ,
बन संबल एक दूजे का साथ निभाए |
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