अब खुल गए हैं पंख मेरे ,
अँधेरे में भी चमक रही हैं नजरें |
चाहतों की उड़ान भरता बावला मन ,
धुंध के परे खुला आसमान |
जूनून , ख्वाहिशें बन गई ताकत ,
उल्हानें नहीं करते अब आहत|
चश्मा चढ़ा गोल्डन फ्रेम वाला ,
क्यों न आए चेहरे पर नूर भला |
चाँदनी छा गई है बालों में ,
तजुर्बा ही मशविरा दे रहे तहजीब में |
अहसासों और जज्बातों के रेले ,
खुबसूरत लम्हों के छोटे-छोटे मेले |
कमी नहीं है भौतिक सुखों की ,
कमी खटकती है अपने दिल के टुकड़ों की |
मोबाइल पर कुछ पल बात कर ,
खुश हो लेती हूँ -उन्हें देख कर |
'नानी-नानी'शब्द की गूंज सुनती हूँ ,
मैं खिल जाती हूँ चहक उठती हूँ |
अब मैं अनुभवियों की श्रेणी में आती हूँ ,
पीढ़ियों के बीच सेतु बन जाती हूँ |
प्रार्थना यही मंगलमय कार्यों की साक्षी बनूँ ,
ख्वाब यही सबके सुख दुःख में भागी बनूँ |
बस , रिश्तों में प्रेम सदा गहरा हो ,
जाने कल जिंदगी में क्या लिखा हो ?
अब तक आपके जीवन में भी कई घटनाएँ घटी होगी ,जिन्हें याद करके कभी आप रो पड़ते होंगे , तो कभी अनायास आपके होठों पर हल्की मुस्कान आ जाती होगी | मेरे जीवन में भी एक रोचक घटना घटी जो कि मेरे लिए काफी प्रेरणास्पद रही , जिसे में कभी भूल नहीं सकती | सच कहूँ तो इस घटना ने मुझे नानी याद दिला दी , दाल- रोटी के सब भाव मालूम पड़ गए | 1975 में गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थी | राशन की बड़ी हायतौबा मच रही थी | मालूम पड़ा - फलाने दिन दुकान पर राशन आने वाला है , पर भेजा किसे जाय ? माताजी सबकी तरफ प्रश्न भरी निगाहों से देखने लगीं | राशन लाना ,मतलब पूरा दिन लगा देना | नौकर ने गौने के लिए यही दिन उचित समझा अतः छुट्टी ...
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