उदासी में जब कोई नहीं होता साथ ,
विश्वास है-वो तो सदा रहता है साथ |
विश्वास का नहीं होता कोई आकार ,
इसलिए ' वो ' भगवान है निराकार
हर पल, हर घड़ी में इबादत की ,
प्रार्थी बन मंदिरों में घंटनाद किए |
इस आस्था ने मुझे आस्तिक बना दिया ,
हर हालात में उस पर निर्भर बना दिया |
राह पर चलते , जब मंज़र बदल जाते हैं ,
उम्मीद टूटने पर विचार ही बदल जाते हैं |
जीवन के झंझावात में मैं चूर हो गई ,
उसके अहसास की आस्था ही टूट गई |
विश्वास है-वो तो सदा रहता है साथ |
विश्वास का नहीं होता कोई आकार ,
इसलिए ' वो ' भगवान है निराकार
हर पल, हर घड़ी में इबादत की ,
प्रार्थी बन मंदिरों में घंटनाद किए |
इस आस्था ने मुझे आस्तिक बना दिया ,
हर हालात में उस पर निर्भर बना दिया |
राह पर चलते , जब मंज़र बदल जाते हैं ,
उम्मीद टूटने पर विचार ही बदल जाते हैं |
जीवन के झंझावात में मैं चूर हो गई ,
उसके अहसास की आस्था ही टूट गई |
व्यर्थ है विश्वास, उस झूठी आशा पर ,
व्यर्थ है विश्वास , उस मुग़ालता पर |
एक पल ही में मैं नास्तिक बन गई ,
जो हासिल था उसे ही क़बूल कर गई |
आस्तिकता और नास्तिकता के भंवर से,
उबर गई मैं अब इस उलझन से |
दर्द का अहसास हो या सुख की चाह ,
ईश की मौजूदगी दिखाती सदा राह |
उसके होने में ही है स्वयं पर विश्वास ,
मेहनत से ही बढ़ रही पूरी आस |
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