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कंगन

                                                       दो दिन बाद सावित्री और रोहित की इकलौती बेटी विभा की शादी है | शादी में रोहित के सभी अपने रिश्तेदार आए हैं , पर सावित्री का मन उदास है  | शादी में शामिल होने के लिए विदेश से भाई नीरज अकेला आया है , भाभी नीरा नहीं आई | पीहर के नाम पर एक भाई ही तो है | महिलाओं के जीवन का बड़ा सच है कि पीहर की देहरी भले ही फेरे लेते ही पराई हो जाती है , पर पीहर से आत्मीयता कभी कम नहीं होती | भाई - भाभी दोनों ही शादी में शामिल होते तो रौनक बढ़ जाती | वैसे भी विभा अकेली बेटी , बाद में कौनसा मौका आएगा , जिसमें वे बहन के घर विदेश से आयेंगे ! अचानक विभा की आवाज से सावित्री का ध्यान भंग हुआ - ' रमेश मामा आ गए , मामी आ गई | ' नीरज का दोस्त रमेश , जिसने सावित्री को हमेशा बड़ी बहन का मान दिया | सावित्री भी रमेश और रमा के व्यवहार से सदा खुश रही | दोनों को देखते ही सावित्री के चेहरे पर चमक आ गई | लगा - रिश्ते खून के ही नहीं , अहसास के होते हैं |
                                                      मेहमानों के आवभगत और शादी के रीति - रिवाजों में कोई कमी न रह जाय- इस बात का रमेश और रमा पूरा ध्यान रख रहे हैं | नीरज भी सभी के स्वागत में व्यस्त है |अचानक रमा के मोबाइल की घंटी बजी | नीरा का फ़ोन था | मेहमानों के शोर में ठीक से बात न हो पाती इसलिए वह कमरे में चली गई |
नीरा -" रमा भाभी , आप शादी में शामिल हो गई , बहुत अच्छा किया | वैसे भी भारत में एक शहर से दूसरे शहर जाना आसान है , परन्तु विदेश से भारत पहुंचना बहुत खर्चीला है | अच्छा आप बताओ - आप विभा को क्या दे रही हो ? "
रमा - " ज्यादा कुछ नहीं , सोने के झुमके लाए हैं | "
नीरा - " मैंने तो नीरज के साथ भारी कंगन भेजे हैं | मैंने ना आकर ऊपर होने वाले खर्चे को टाल कर कीमती कंगन के रूप में महंगा गिफ्ट दे दिया | शादी में आना , नहीं आना - दो दिनों में सब भूला जायेंगा | बस , दिया गिफ्ट याद रहेगा | हमारा निभाया ' व्यवहार ' कंगन के रूप में हमेशा याद रहेगा | "
रमा - " अच्छा भाभी, फ़ोन रखती हूँ , जीजी मुझे पुकार रही हैं | "
                                                  फ़ोन रखने के बाद रमा का मन बड़ा कसैला हो गया | ' व्यवहार ' की इतनी कटु व्याख्या ने रिश्ते की धज्जियाँ उड़ा दी थी | सोचने लगी - यदि हम दोनों भी शादी में न आ पाते , तो जीजी के मायके का मान कम हो जाता | मायके वालों का सम्मान तो मायके वालों के शामिल होने से ही बढ़ता है |
                                                 शादी भी धूमधाम से हो गई | विभा विदा हो गई | सभी रिश्तेदार् भी रुखसत होने लगे | रमेश और रमा ने सावित्री और रोहित से विदा होने की इजाजत ली | सावित्री के जज्बात आँखों में थिरक आए , बोली - " तुम दोनों की मौजूदगी हमारे लिए संबल बनी | विवाह की भागदौड़ में , घबराहट में रमेश का जादुई वाक्य -' जीजी , सब हो जाएगा ' तो मानो हिम्मत बंधाए रखता | "
                                                 कुछ ही देर बाद नीरज के भी जाने का समय हो गया | बहन - जीजा के पैर छूते हुए बोला - " जीजी , नीरा के भेजे कंगन पसंद आए ना ! "
" हाँ , भैय्या , क्यों ना पसंद आयेंगे | सभी लोगों की दी हुई कीमती चीजें बहुतायत में उपलब्ध हैं , बस समय और भागीदारी भी सुलभ हो तो चीजों की कीमत दूनी हो जाती है | "

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