छुट्टियों में बच्चों का घर पर आना ,
है बड़ा सुखद जीवन बन नानी - नाना |
सिद्धांत ,सुहानी ,गौरांश और रिवान ,
देख इन्हें आती लबों पे मीठी मुस्कान |
ह्रदय इनके हैं मासूम , कोमल सरीखे ,
दूर इनसे द्वेष - दंभ के कांटे तीखे |
हर चीज जानने को मन बड़ा हठीला ,
उत्सुकता प्रबल, है मन बड़ा बावला |
आपके यहाँ इत्ती गर्मी क्यों ?
सुबह ये मोर शोर मचाते क्यों ?
नन्हीं चींटी दाना ले कर चढ़ती क्यों ?
दीवार पर सौ बार फिसलती क्यों ?
रोज -रोज नानू टॉफी दिलाते क्यों ?
तो नानी , आप नाराज होती क्यों ?
एक स्मार्ट फ़ोन हमारे पास हो तो ,
हमारी मम्मा को समझाओ तो |
रोना मचलना है अधिकार इनका ,
मोती से आंसू है हथियार इनका |
दृगों में कुतूहल है छलक रहा ,
मुख पर विजय - गर्व झलक रहा |
प्यारा - सा खेल - खिलौना बचपन ,
भागती दुनिया में सुकून - सा बचपन |
ये रोम-रोम आल्हादित कर जाते ,
नाना-नानी को 'फुल रिचार्ज ' कर जाते |
है बड़ा सुखद जीवन बन नानी - नाना |
सिद्धांत ,सुहानी ,गौरांश और रिवान ,
देख इन्हें आती लबों पे मीठी मुस्कान |
ह्रदय इनके हैं मासूम , कोमल सरीखे ,
दूर इनसे द्वेष - दंभ के कांटे तीखे |
हर चीज जानने को मन बड़ा हठीला ,
उत्सुकता प्रबल, है मन बड़ा बावला |
आपके यहाँ इत्ती गर्मी क्यों ?
सुबह ये मोर शोर मचाते क्यों ?
नन्हीं चींटी दाना ले कर चढ़ती क्यों ?
दीवार पर सौ बार फिसलती क्यों ?
रोज -रोज नानू टॉफी दिलाते क्यों ?
तो नानी , आप नाराज होती क्यों ?
एक स्मार्ट फ़ोन हमारे पास हो तो ,
हमारी मम्मा को समझाओ तो |
रोना मचलना है अधिकार इनका ,
मोती से आंसू है हथियार इनका |
दृगों में कुतूहल है छलक रहा ,
मुख पर विजय - गर्व झलक रहा |
प्यारा - सा खेल - खिलौना बचपन ,
भागती दुनिया में सुकून - सा बचपन |
ये रोम-रोम आल्हादित कर जाते ,
नाना-नानी को 'फुल रिचार्ज ' कर जाते |
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