ओम जय जगदीश हरे , ओम जय जगदीश हरे ,
प्रभु , तेरे द्वार रत्न भण्डार , तेरे घर बड़े हरे -भरे |
पद्मनाभ हो या वैष्णो देवी या हो तिरुपति ,
शिरडी हो या सिद्धी विनायक गणपति |
तहखानों में बरसती सम्पदा रिमझिम-रिमझिम ,
खुल जा सिम सिम , खुल जा सिम सिम |
प्रभु जग ने जाना भारत है सोने की चिड़िया ,
जानो , बूझो कितनी चमकीली, विराट है चिड़िया !
इस सोने की चिड़िया से क्या होगा देश का भला ?
क्या धन सम्पदा जरुरतमंदो को रहेगा फला ?
प्रभु , तूने बहुत कुछ दिया , तेरा तुझको अर्पण ,
पर जब तुझसे न संभले , कर मुझ को ही अर्पण |
जो प्रसाद चढ़ाते , मिल-जुट-बाँट खा लेते ,
कोई ऐसी राह बना , चढ़ावा न चढ़ जाये स्विस के खाते|
प्रभु , हर रूप में है तू नारायण ,
हाथ जोड़ खड़े हम दरिद्र- नारायण |
प्रभु , तू है पूर्ण , नहीं चाहिए तुझे कुछ ,
आशीष बनाए रखना , हम पा जाए बहुत कुछ |
ओम जय जगदीश हरे , ओम जय जगदीश हरे |
प्रभु , तेरे द्वार रत्न भण्डार , तेरे घर बड़े हरे -भरे |
पद्मनाभ हो या वैष्णो देवी या हो तिरुपति ,
शिरडी हो या सिद्धी विनायक गणपति |
तहखानों में बरसती सम्पदा रिमझिम-रिमझिम ,
खुल जा सिम सिम , खुल जा सिम सिम |
प्रभु जग ने जाना भारत है सोने की चिड़िया ,
जानो , बूझो कितनी चमकीली, विराट है चिड़िया !
इस सोने की चिड़िया से क्या होगा देश का भला ?
क्या धन सम्पदा जरुरतमंदो को रहेगा फला ?
प्रभु , तूने बहुत कुछ दिया , तेरा तुझको अर्पण ,
पर जब तुझसे न संभले , कर मुझ को ही अर्पण |
जो प्रसाद चढ़ाते , मिल-जुट-बाँट खा लेते ,
कोई ऐसी राह बना , चढ़ावा न चढ़ जाये स्विस के खाते|
प्रभु , हर रूप में है तू नारायण ,
हाथ जोड़ खड़े हम दरिद्र- नारायण |
प्रभु , तू है पूर्ण , नहीं चाहिए तुझे कुछ ,
आशीष बनाए रखना , हम पा जाए बहुत कुछ |
ओम जय जगदीश हरे , ओम जय जगदीश हरे |
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