नहीं चाहती दीपों में एक दीप जलाऊं ,
चाह यही, गहन तिमिर में एक दीप जलाऊं |
हर वर्ष हम रस्म - गुजारा कर लेते हैं |
आओ , इस बार नया कुछ कर लेते हैं |
शहीदों के परिवार में है नैराश्य का अंधकार ,
सूना है हर पर्व , हर पल उनमें है मायूसी के उद्गार |
आओ , शहीदों की शहादत को स्मरण करें ,
एक दीप जला , संग पर्व मना ,नमन करें , नमन करें |
माई की झुग्गी में है घनघोर अँधेरा ,
आओ, दीप जला , झुग्गी में कर दे उजेरा |
रामू रोशनी बिना न हो सका शिक्षित ,
एक दीप जला , उसका जीवन कर दे प्रमुदित |
सौहार्द और प्रेम की छटा सदा बनी रहे ,
एक दीया माटी का वृत्तिका संग हुंकार भरे |
जात-पात का भेद , द्वेष - भाव का हो विसर्जन ,
सच मानो तो यही दिवाली है
चाह यही, गहन तिमिर में एक दीप जलाऊं |
हर वर्ष हम रस्म - गुजारा कर लेते हैं |
आओ , इस बार नया कुछ कर लेते हैं |
शहीदों के परिवार में है नैराश्य का अंधकार ,
सूना है हर पर्व , हर पल उनमें है मायूसी के उद्गार |
आओ , शहीदों की शहादत को स्मरण करें ,
एक दीप जला , संग पर्व मना ,नमन करें , नमन करें |
माई की झुग्गी में है घनघोर अँधेरा ,
आओ, दीप जला , झुग्गी में कर दे उजेरा |
रामू रोशनी बिना न हो सका शिक्षित ,
एक दीप जला , उसका जीवन कर दे प्रमुदित |
सौहार्द और प्रेम की छटा सदा बनी रहे ,
एक दीया माटी का वृत्तिका संग हुंकार भरे |
जात-पात का भेद , द्वेष - भाव का हो विसर्जन ,
सच मानो तो यही दिवाली है
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