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सीख

                                             दीनदयाल की दिनचर्या बड़ी शिथिल हो गई है | रिटायरमेंट में करने को कुछ नहीं | जब - तब खिड़की के पास कुर्सी डाल कर बैठ जाते हैं | सामने आम के पेड़ पर इनकी निगाहें टिकी हुई है | कई दिनों से देख रहे हैं - एक चिड़िया घोंसला बनाने में जुटी है | तीन डालों के संगम पर कुछ तिनके टिकाकर उस पर घोंसला बनाना - अनोखी कारीगरी ही है | एक - एक तिनका चुनकर चोंच में दबाकर लाना - एक साधना से कम नहीं | वे देख रहे हैं - कई बार चिड़िया कुछ तिनकों को फेंकती भी जाती है , शायद नाप - तोल में कमी रह जाती होगी | कभी धागे , कभी कपड़े की बारीक चिंदी उठा लाई | घर बुनना और चुनना - सभी काम चोंच से ही कर रही है | यह घोंसला बनाने वाली चिड़िया और कोई नहीं -  एक होने वाली माँ है -जो अपने आने वाले बच्चे के लिए महल बना रही है | दीनदयाल सोच रहे हैं - यह खुद के लिए तो कभी घर नहीं बनाती | यह बसाहट सिर्फ बच्चों के लिए |
                                              हम इंसान इन परिंदों से सीख नहीं लेते | उन्हें याद हो आया - नौकरी के रहते दो बेटियों और एक बेटे को पढ़ाया , छोटा सा मकान खड़ा कर लिया | बेटियों की शादी हो गई | बेटे नीरज की शादी के वक्त मकान को एक मंजिला बना लिया | बहुत मजे से दिन कट रहे थे | पोता - पोती को गोद में भी खिलाया | एक दिन नीरज ने खबर दी -" पापा , मैंने ऑस्टेलिया की एक कम्पनी में अर्जी दी थी ,नौकरी तय हो गई है | " बस , वह चला गया और कुछ दिन बाद बहू और बच्चे भी - | अब रह गए दीनदयाल और उनकी पत्नी सावित्री | वहाँ की छुट्टियों के समय बच्चे आए | रहन - सहन बदल गया , बोली बदल गई | अपना घर ' दादू-दादी माँ ' का घर हो गया | विदेश में बसा घर ' अपना घर ' |
                                             पक्षियों की आवाज से दीनदयाल की तन्द्रा भंग हुई - 'अरे , इसमे तो बच्चे अंडे से बाहर आ गए | दीनदयाल की निगाह सदा घोंसले पर ही रहती | दिनोंदिन घोंसले में बच्चों का चहचहाना बढ़ता ही रहा | एक समय ऐसा भी आया - बच्चों ने फुदकते - फुदकते उड़ना ही सीख लिया | बच्चे उड़ना सीख गए , समझो जीना सीख गए - तो माँ की पारिवारिक जिम्मेदारी भी पूरी हुई और बंधकर रहने की मियाद भी ख़त्म | फिर वही पेड़ - पौधों की डालियों के फेरे और आसमान का बसेरा |
                                               जिसने दुनिया बनाई , उसकी विद्वता पर हैरानी होती है | जिसे पर दिए , उन्हें किसी तरह के बंधन में नहीं रखा और हम बेपर वाले समझदार माने जाने वाले इंसान मोह के बंधन में बंध कर रह गए |

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