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मॉर्निंग वाक

                                                    उम्र की झलक चेहरे पर , तन पर दिखने लगी , शिथिलता और थकान महसूस होने लगी , तो स्वास्थ्य के प्रति जागृत होने की भावना भी जाग उठी | लो जी , हमने प्रातः-सैर शुरु कर दी | हाँ , सही फरमाया - ' मोर्निंग वाक '| घर पास ही बहुत बड़ा पार्क है | प्रातःकाल-सैर के लिए उचित जगह है | सूरज की बाट जोहती पहली किरण से भी पूर्व सैर के लिए निकल जाती हूँ |
                                                      यह पार्क सुनियोजित तरीके से बड़े वृक्षों , छोटे पौधों से सुसज्जित है | इस समय गुलमोहर की बहार है और नीम के वृक्ष नव पत्तों और निम्बोली से आच्छादित हैं | इन वृक्षों को देख कर लगता है - कुदरत की नेकियों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है | जड़ें जितनी गहरी होती हैं , पेड़ का फैलाव भी उतना ही ज्यादा होगा | शांखे मजबूत और छांव गहरी हो जाती है | यह सच्चाई तो रिश्ते और परिवार, समाज में भी लागू होती है | कुदरत अपने तरीके से सिखा रही है कि अच्छे विस्तार के लिए गहरी पकड़ जरुरी है | जड़ों का भरोसा मिलता रहे तो तना तनकर खड़ा रहता है | बड़े पेड़ अपने पैरों के पास उगते छुटके पौधों की पीठ थपथपाते जाहिर होते हैं कि ' जिओ , बड़े हो जाओ ' | घास का अहसास, फिजां में खुशबू और जिन्दा रंगों के बीच सैर का आनंद अनूठा है |
                                                      प्रतिदिन कई जोड़े घूमने आते हैं | चिरपरिचित चेहरे हैं , पर अजनबियत बनी हुई है | कुछ शांत , कुछ अशांत , कुछ खुश , कुछ नाखुश - विभिन्न भाव चेहरे पर देखने को मिल जाते हैं | एक महिला को तो प्रायः हाथ मटकाते हुए बोलते हुए ही देखा है | संभवतः उनके श्रीमान को उनकी बातें सुनाने का यही समय मिल पाता होगा | एक बोलने वाला हो तो एक सुनने वाला भी जरुरी है और सुनने के लिए खामोश रहना जरुरी है | यहाँ सैर करने वाले सभी अपने - अपने तरीके से सेहत के प्रति जागरूक हैं | कुछ तेज चलते हुए , कुछ दौड़ते हुए , कुछ गुनगुनाते हुए सैर करते हैं | कुछ स्थूलकाय भी हैं , जिनके बेडौल शरीर को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन्हें जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता होगा | एक महिला से प्रतिदिन सामना होता है | उनके हाथ में दो थैलियाँ और एक पानी की बोतल रहती है | वे पार्क के चारों तरफ बनी दीवार के पास खड़ी होती हैं | एक थैली में से अनाज के  दाने निकाल कर उस दीवार के मुंडेर पर बिखेर देती हैं  , जिससे पक्षियों को खुराक मिल सके | वहीं पास के पेड़ों की शाखा परिंडे लटके हुए हैं , उनमे वे अपनी बोतल से पानी डाल देती हैं | इस तरह पक्षी भोजन के बाद प्यास भी बुझा सकें | यह बहुत नेक काम है | दूसरी थैली में से वे थोडा आटा निकालकर नीचे कच्ची जमीन पर डाल देती हैं , जिससे चीटियों को भी कुछ खुराक मिल जाए | पर उनका यह काम नेकी का नहीं माना जा सकता | ये चीटियाँ दूर तक फैल जाती हैं जिससे सैर करने वालों के पैरों से कुचली जाती हैं | कहना नहीं होगा कि जब इनके घर में चीटियाँ निकलेंगी , तो ये कीटनाशक दवा का छिड़काव करेंगी |
                                                    कई जवान युवक - युवतियां भी तेज रफ़्तार  , भागते क़दमों से सैर करते हैं | इनके हाथ में मोबाइल , कानों पर इअरफ़ोन लगा रहता है | मोबाइल एक द्विआयामी दुनिया है | एक छोटा सा उपकरण - बहुत सहूलियतें देता है | सेहत के साथ गानों का मनोरंजन और बाहरी दुनिया के शोर-शराबे से बेखबर | पार्क के अन्दर २-३ दुकानें हैं , जिन पर विभिन्न स्वाद के ताजे स्वास्थ्यवर्धक रस मिलते हैं - लौकी , करेला , आंवला , घृतकुमारी के रस , डाब....| पार्क से बाहर निकलने से पूर्व यहाँ पहुंचना मेरा नियमित क्रम हो गया है | मेरी तरह कई लोग नियमित रूप से रस का स्वाद लेते हैं | रोज इस  जगह पर उनसे मुलाकात हो ही जाती है | इत्मीनान से अपने गिलास का इन्तजार करते हैं , इस मकसद से लम्हों में मुस्कान बंट ही जाती है | किसी परिचित को देख कर मुस्कराना -दोस्ताना संवाद का पहला कदम भी माना जा सकता है | कई बार ......वे लोग ....न दिखने पर आँखें खोजती रहती हैं और उनके कुशल क्षेम के लिए मन ही मन प्रार्थना करती हूँ | आज तो कुछ अनोखा हुआ | बोलते रहने वाली महिला खामोश थी  और श्रीमान बोल रहे थे | आज ' उन ' दूसरी महिला ने पक्षियों के लिए दाना बिखेरा , परन्तु चीटियों के लिए आटा नहीं डाला |
                                                  ' मोर्निंग वाक ' सेहत बनाने की कुंजी भर नहीं है , बिना रिश्तों के परिचित चेहरों को देखने का सुखद अहसास भी है | जिस प्रकार पेड़ को दो इंच गहरी मिटटी में नहीं लगाया जा सकता , वैसे ही अच्छी सेहत के लिए प्रभावी कोशिश भी उसी मुताबिक़ होनी चाहिए |

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