कुछ बीते लम्हें यादों में ठहरे हैं ,
उनीदीं आँखों में ख्वाब सुनहरे हैं |
समय के साथ भागमभाग कर रहे हम ,
चल न सके कभी फुरसत के चार कदम |
आओ , दो पल फुरसत के नाम करें ||
कुछ मुरीदों के ढेर , कुछ मुनिदों के धागे ,
जुड़ता रहा नया सफा जिन्दगी के आगे |
पलटते रहे कलेंडर के पन्ने ,गुजरते रहे दिन , साल |
अपना चेहरा देख आईना भी पूछ रहा सवाल |
आओ , दो पल फुरसत के नाम करें ||
उबरना चाहती हूँ अनचाही लम्हों की चुभन से ,
जागना नहीं चाहती , उस तिलस्मी ख्वाबों से |
सुबह आने से पहले रात गुजर जायेगी ,
नजारों की ये हंसीं मुलाक़ात गुजर जाएगी |
आओ , दो पल फुरसत के नाम करें ||
रोज उसी मंजिल जाना है और आना है ,
फिर इन क़दमों में इतनी हड़बड़ी क्यों है ?
जिंदगी के हसीन यादों के दरख्त बढ़ने दें ,
चुभती यादों की खरपतवार उखाड़ दें |
आओ , दो पल फुरसत के नाम करें ||
उनीदीं आँखों में ख्वाब सुनहरे हैं |
समय के साथ भागमभाग कर रहे हम ,
चल न सके कभी फुरसत के चार कदम |
आओ , दो पल फुरसत के नाम करें ||
कुछ मुरीदों के ढेर , कुछ मुनिदों के धागे ,
जुड़ता रहा नया सफा जिन्दगी के आगे |
पलटते रहे कलेंडर के पन्ने ,गुजरते रहे दिन , साल |
अपना चेहरा देख आईना भी पूछ रहा सवाल |
आओ , दो पल फुरसत के नाम करें ||
उबरना चाहती हूँ अनचाही लम्हों की चुभन से ,
जागना नहीं चाहती , उस तिलस्मी ख्वाबों से |
सुबह आने से पहले रात गुजर जायेगी ,
नजारों की ये हंसीं मुलाक़ात गुजर जाएगी |
आओ , दो पल फुरसत के नाम करें ||
रोज उसी मंजिल जाना है और आना है ,
फिर इन क़दमों में इतनी हड़बड़ी क्यों है ?
जिंदगी के हसीन यादों के दरख्त बढ़ने दें ,
चुभती यादों की खरपतवार उखाड़ दें |
आओ , दो पल फुरसत के नाम करें ||
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