रामदीन एक खेतिहर मजदूर- दूसरों के खेत में मजदूरी करना ही इसका कमाई का साधन रहा | परिवार में बूढी मां , पत्नी और तीन बच्चे हैं | इस वर्ष तो अकाल से खेत तो सूखे ही , घर में भी खाने के लाले पड़ गए , तिस पर बीमार मां | चार दिन से चूल्हा नहीं जला , आज तो अनाज की व्यवस्था करनी होगी | यह पीतल का मटका किस काम का ? पत्नी को बता कर वह मटका बाजार ले गया और उसे बेचने पर २०० रुपये उसके हाथ में आये | तभी उसने देखा - एक जीप पर सवार एक व्यक्ति माइक से घोषणा कर रहा था - ' सरकार इस गाँव में पक्की सड़क बनाना चाहती है , जिसके लिए मजदूरों की जरुरत होगी , जो भी काम करना चाहता हो , अपना नाम यहाँ की पंचायत में लिखा दे | ' रामदीन ने सोचा - ' इस काम में देर क्यों करूँ ' तुरंत पंचायत में पहुंच कर मजदूरों में अपना नाम लिखा दिया | अगले दिन से अपनी हाजिरी लिखाकर अन्य मजदूरों के साथ सड़क खुदाई में जुट गया |
रामदीन को काम करते हुए एक माह हो गया | घर में फिर विपन्नता छा गई , फांके लगने लगे | पत्नी ने कहा - " आज कुछ रुपये हाथ में आ जाते , तो अनाज , दवा की व्यवस्था हो जाती |"
शाम को काम ख़त्म करने के बाद रामदीन सुपरवाइजर के पास गया और हाथ जोड़ कर बोला - " हुजूर ,मुझे महिना भर हो गया मजदूरी करते हुए , कुछ रुपये मिल जाते तो ....आपकी मेहरबानी होगी | "
सुपरवाइजर -" यह ले ५०० रुपये , बाकी तनख्वाह तू पहले ले ही चुका है | '
रामदीन - " नहीं , सरकार , मैंने एक पैसा ना लिया | "
रजिस्टर को रामदीन के सामने करते हुए सुपरवाइजर चिल्लाया - " तो क्या मैं झूठ बोल रहा हूँ , यह देख | "
रामदीन के लिए काला अक्षर भैंस बराबर | झुंझलाता , गुस्से में जमीन पर पत्थरों को ठोकर मारता हुआ वह बेसुध चला जा रहा था | अचानक एक मोटर साइकिल के ब्रेक से चौंक गया | यह तो अपना राजन है- गिरधर का बेटा |
राजन - " काका, आप सड़क के बीच में क्यों चल रहे हो ? आप इतने परेशान क्यों हो ? चलो , घर चलते हैं | "
रामदीन राजन के साथ घर आया और बताया कि सुपरवाइजर ने उसे एक महीने काम के एवज में मात्र ५०० रुपये दिए |
राजन - " काका, आपने आधार कार्ड बनवाया है क्या ? बैंक में आपका खाता है क्या ? "
रामदीन -" ना बेटा, मैं क्या जानू ये कार्ड-वार्ड | घर में रुपये जमा ही ना हुए , तो खाता भी ना खोला | "
राजन - " काका , आओ मेरे साथ | "
राजन ने पोस्ट ऑफिस में जा कर रामदीन का आधार कार्ड बनवा दिया | बैंक में खाता खुलवा दिया और खाते को आधार कार्ड से जोड़ दिया | अब राजन रामदीन के साथ सुपरवाइजर के पास गया | उन्हें रामदीन के आधार कार्ड का नम्बर एवं खाता संख्या लिखा दिया और कहा - " सरकार की योजना के अनुसार इनकी मजदूरी इनके खाते में ही भेजना | "
अब तो गाँव के हर व्यक्ति ने आधार कार्ड बनवा कर उसे बैंक खाते से जोड़ लिया | सभी सरकारी योजनाओं में ' आधार ' ने गरीबों को बिचौलिया-कर से मुक्त कर दिया |
रामदीन को काम करते हुए एक माह हो गया | घर में फिर विपन्नता छा गई , फांके लगने लगे | पत्नी ने कहा - " आज कुछ रुपये हाथ में आ जाते , तो अनाज , दवा की व्यवस्था हो जाती |"
शाम को काम ख़त्म करने के बाद रामदीन सुपरवाइजर के पास गया और हाथ जोड़ कर बोला - " हुजूर ,मुझे महिना भर हो गया मजदूरी करते हुए , कुछ रुपये मिल जाते तो ....आपकी मेहरबानी होगी | "
सुपरवाइजर -" यह ले ५०० रुपये , बाकी तनख्वाह तू पहले ले ही चुका है | '
रामदीन - " नहीं , सरकार , मैंने एक पैसा ना लिया | "
रजिस्टर को रामदीन के सामने करते हुए सुपरवाइजर चिल्लाया - " तो क्या मैं झूठ बोल रहा हूँ , यह देख | "
रामदीन के लिए काला अक्षर भैंस बराबर | झुंझलाता , गुस्से में जमीन पर पत्थरों को ठोकर मारता हुआ वह बेसुध चला जा रहा था | अचानक एक मोटर साइकिल के ब्रेक से चौंक गया | यह तो अपना राजन है- गिरधर का बेटा |
राजन - " काका, आप सड़क के बीच में क्यों चल रहे हो ? आप इतने परेशान क्यों हो ? चलो , घर चलते हैं | "
रामदीन राजन के साथ घर आया और बताया कि सुपरवाइजर ने उसे एक महीने काम के एवज में मात्र ५०० रुपये दिए |
राजन - " काका, आपने आधार कार्ड बनवाया है क्या ? बैंक में आपका खाता है क्या ? "
रामदीन -" ना बेटा, मैं क्या जानू ये कार्ड-वार्ड | घर में रुपये जमा ही ना हुए , तो खाता भी ना खोला | "
राजन - " काका , आओ मेरे साथ | "
राजन ने पोस्ट ऑफिस में जा कर रामदीन का आधार कार्ड बनवा दिया | बैंक में खाता खुलवा दिया और खाते को आधार कार्ड से जोड़ दिया | अब राजन रामदीन के साथ सुपरवाइजर के पास गया | उन्हें रामदीन के आधार कार्ड का नम्बर एवं खाता संख्या लिखा दिया और कहा - " सरकार की योजना के अनुसार इनकी मजदूरी इनके खाते में ही भेजना | "
अब तो गाँव के हर व्यक्ति ने आधार कार्ड बनवा कर उसे बैंक खाते से जोड़ लिया | सभी सरकारी योजनाओं में ' आधार ' ने गरीबों को बिचौलिया-कर से मुक्त कर दिया |
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