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घर पधारो गजानंद

एक व्यक्ति गरीबी से त्रस्त था | किसी ने सुझाव दिया - ' गणेश जी की पूजा कर , प्रथम आराध्य देव हैं | तेरी सभी परेशानियाँ दूर हो जाएँगी | ' वह अगले ही दिन गणेश जी की मूर्ति ले आया और घर में स्थापित कर ली | रोज स्त्रोतों  का पाठ करता | घंटे-घड़ियाल बजाता | पूजा -अर्चना में कोई कमी नहीं रखी | दो वर्ष  बीत गए , परन्तु आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं आया |


एक दिन उसने गुस्से में गणेश जी की मूर्ति को हटा कर लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित कर दी | गणेश जी से तो नाराज था ही | अगरबत्ती का धुआं , घंटो की आवाज गणेश जी तक न पहुंचे इसलिए रुई की गोलियाँ गणेश जी कान - नाक में लगा दी | इस तरह उसकी नाराजगी साफ जाहिर हो रही थी |

 थोड़ी ही देर में गणेश जी की मूर्ति हँसने लगी | अब तो वह घबरा गया | विस्मय दृष्टी से गणेश जी को देखने लगा | गणेश जी बोले -" जब तक तू हमें जड़ मानता रहा , तब तक हम भी जड़ भगवान् थे | पर आज तूने मुझ में चेतना की अभिव्यक्ति करा दी , तू मुझे तुझ से मिलने आना ही पड़ा |


गणपति बाप्पा मोरिया |

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